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हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Friday, 4 May 2018

जड़ से ख़त्म करे अस्थमा natural remedies for asthma

इस पोस्ट मे asthma treatment in hindi और asthma treatment in ayurveda या फिर आप खोज रहे how to cure asthma naturally permanently या फिर asthma ka pakka ilaj ये सारे टॉपिक कवर किये गये है अगर आप को अस्थमा की दिक्कत है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है कुछ घरेलु उपाय आजमायें और अस्थमा को जड़ से ख़त्म करे.

अस्थमा  को बहुत सारे लोग "दमा" के नाम  भी बुलाते हैं । अस्थमा साँस और फेफड़ो से जुड़ी बीमारी है, जो स्वास नालिकाओ पर अपना को प्रभाव डालती है।स्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर और बाहर करती हैं। अस्थमा से  इन नलिकाओं की अन्दर  सूजन और संकुचन हो जाता है जिसके कारण  फेफड़ो में हवा का प्रवाह सही से नहीं हो पाता हैं । जिसकी वजह से व्यक्ति को साँस लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं । जिससे व्यक्ति के शरीर को आवश्यक ऑक्सीजन नहीं मिलता है ।जिसकी कारण से बहुत गम्भीर अवस्था में रोगी की मौत तक हो जाती हैं ।
                                                     
आप इस पोस्ट को बहुत ध्यान से पढ़े क्यों की हम बहुत छान-बीन कर के ये सरे टिप्स आप के लिए लाते है.
हमारा एक ही लक्ष्य है की इस देश मे कोई बीमार न पढ़े ,हर इंसान हेल्थी रहे और तंदुरुस्त रहे.
दमा एक ऐसी बीमारी है जिसके कारण साँस लेने मे दिक्कत होती है क्यों की साँस लेने के रास्ते मे सूजन आ जाती है,उस रास्ते मे कफ जम जाता है और नसे सुकुड जाती है जिसकी वजह से साँस लेने मे काफी दिक्कत आती है.दमा रोगी को चाहती मे कसाव जैसा लगता है,साँस फूलने लगती है ,खासी आती है.ऐसा होता है प्रदूषण के कारण और धुल मिट्ठी के कारण जिस से हमारे फेफड़े मे गन्दगी जमा हो जाती है.


जब ये धुल-मिट्ठी हमारे फेफड़े  मे साँस के जरिये जाते है तो वह इन्फेक्शन हो जाता है.जिस से खासने की वजह से वह की नसो मे सूजन आ जाती है.और नसे सुकदने लगती है और साँस लेने मे दिक्कत होती है इसके आलवा जो लोग मैदे से बनी चीज़ रोज खा रहे है या फिर रोज खाते है और जिसमे फाइबर की मात्रा बहुत कम होती है.तो ऐसी चीज़ आंत मे जा के चिपकेगीजिस से बड़ी आंत धीरे-धीरे  कचरे से भरती जाएगी और वह की दीवार मोटी होती जाएगी.जैसे-जैसे इसमें कचरा बढेगा आप कोदिक्कत होना स्टार्ट होगा.इसलिये आयुर्वेद मे कहा गया है की मैदे से बनी कोई भी चीज़ रोजाना आहार मे न खाए.बड़ी आंत मे कचरा बढने से इसमें अधिक कफ का निर्माण होने लगता है और वो फेफड़े की और जाने लगता है और जमने लगता हैजिस से साँस लेने मे दिक्कत होती है और ये अत्यधिक कफ का निर्माण बड़ी आंत मे अत्यधिक कचरा जमने के कारण होता है.दोस्तों मैदा तो अपने आप मे ख़राब है ही लेकिन इस भी खराब चीज़ है  मैदे को सड़ी कर बनाई गयी चीज़.


 0.दालचीनी पाउड और गुड
1 चम्मच दालचीनी पाउडर ले इसके बाद थोडा सा गुड मिला ले और इनको बहतु अच्छे से मिला ले.और फिर इसे आप धीरे-धीरे चबा कर खाए और जब आप पूरा मिक्सचर खा ले तो इसके बाद हो सकते तो नारियल भी खा ले.ऐसा अगर रोजाना 3-4 बार करते है तो आप
को बहुत ही अच्छा रिजल्ट मिलेगा


1.अदरक और लहसुन
अदरक और लहसुन दोनों ही अस्थमा के इलाज में बहुत कारगार साबित  होते हैं। अस्थमा की शुरुआती स्टेज में 30 ml दूध में लहसुन की 4 कलियां उबाल कर  डाल दे इस इसको का रोज पिए इसे आप को काफी फायदा होगा।


अस्थमा रोगी को लहसून की चाय या फिर दूध में लहसून उबालकर पीना भी लाभदायक है।
अगर आप चाय पिने के शौकीन है तो अदरक की गर्म चाय में लहसुन की 2-3 कलियां मिलाकर सुबह-शाम पिए इस से भी अस्थमा को कंट्रोल किया जा सकता है।




2.अजवाइन.
गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी अस्थमा को कंट्रोल करने में राहत मिलती है।

आधा कप अजवाइन का रस और इसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर सुबह और शाम खाना के बाद लेने से अस्थमा ख़त्म हो जाता है। अस्थमा के इलाज  के लिए अजवाइन के पानी से भाप लेना भी अच्छा होता है। इसके लिए आप को कुछ ख़ास नहीं करना है बस पानी में अजवाइन डालकर इसे उबालें और पानी से उठती हुई भाप को लें।


3.शहद
शहद को अस्थमा में काफी फायदेमंद माना जाता है। अगर आप दिन में 3 से 4 बार एक गिलास गुनगुने पानी के साथ शहद मिलाकर पि रहे है तो ये अस्थमा को खतम कर सकता है.


4.सहजन की पत्तियां
इसके लिए आप को कुछ नहीं करना है सहजन की पत्तियों को पानी मे डालकर 5 मिनट तक उबाले और फिर उस पानी को छान ले.जब ये पानी थोडा ठंडा हो जाये तो उसमे चुटकी भर नमक,एक चौथाई नींबू का रस और काली मिर्च का पाउडर मिलाकर पियें।ये अस्थमा का बढ़िया इलाज है.





5.मेथी
अस्थमा  रोगी  मेथी को भिगोकर खायें तथा इसका पानी में थोड़ा सा शहद मिलाकर पिए तो रोगी को बहुत अधिक फायदा मिलता है।



मेथी के कुछ दानों को एक गिलास पानी के मे ले के उसे तब तक उबालें जब तक पानी एक तिहाई न हो जाए

अब इस  पानी में शहद और अदरक का रस मिला कर रोज सुबह-शाम पिए करें। आपको  लाभ जरुर होगा।
6.योग

अस्थमा से पीड़ित व्य।क्ति को योगासन और प्राणायाम का अभ्यारस करना चाहिए। इसके लिए सुबह के समय रीढ़ की हड्डी को सीधे रखकर खुली और साफ स्वच्छ हवा में सांस लेनी और छोड़नी चाहिए। इससे भोजन ठीक प्रकार हजम होगा और शरीर को पूरी ऊर्जा मिलेगी। इससे फेफड़े और श्व सन प्रक्रिया भी दुरुस्तस होती है।

7.सूखा अंजीर

अंजीर के बारे मे कहा जाता है जो जितना मीठा है उतना ही फयदेमद है

अंजीर के सूखे फल बहुत लाभकारी होते हैं। यह कफ को जमने से  रोकते हैं। सूखी अंजीर को गर्म पानी में रातभर भिगो कर रख दें। सुबह खाली पेट इसे खा लें। ऐसा करने से साँस नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है। और इससे संक्रमण से भी राहत मिलती है।

8.करेला

करेला बहुत सरे  पोषक गुणों से भरपूर होता है। करेला मे भी बहुत फायदेमंद होता। करेला का एक चम्माच  शहद और तुलसी  के रस के साथ मिला कर खाने से अस्थ‍मा कम  होता है।

9.हरी सब्जियां
संतरे का जूस खूब पिए, हरी गोभी में विटामिन c की मात्रा खूब पायी जाती हैं और यह अस्‍थमा के रोगी के लिये अच्‍छे होते हैं।

अस्थ‍मा के रोगी को भोजन को धीरे-धीरे, अच्छेे से चबाकर और अपनी क्षमता से कम खाना चाहिए। कम से कम 6 से 8 गिलास पानी रोज पीना चाहिए। आहार में कार्बोहाइड्रेट चिकनाई एवं प्रोटीन जैसे पदार्थों को कम से कम और ताजे फल, हरी सब्जियां तथा अंकुरित चने को खूब खाना चाहयिए.

खाने मे ऐसी चीज़े खाए जिनमें विटामिन B की मात्रा ज़्यादा होती हो जैसे दाल और हरी सब्ज़ियां, वो अस्थमैटिक्स को अटैक से बचाती हैं।

10.तेल की मालिश


फेफड़े के अन्दर ठडक को निकालने के लिए छाती और पीठ पर कोई गर्म  करने वाला तेल लगाकर ऊपर से रुई की पर्त बिछाकर रातभर या दिन भर बनियान पहने रहें।

अस्थ‍मा होने पर छाती और रीढ़ की हड्डी पर सरसों के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करनी चाहिए। मालिश करने के कुछ देर बाद स्टी‍मबॉथ भी करना चाहिए। ऐसा रोजाना करने से  अस्थ‍मा में आराम मिलने लगता है।

11.तुलसी

तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च मिलाकर खाने  से अस्थमा कंट्रोल में रहता है।
अस्थमा के बारे मे और जाने

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