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पंचतंत्र कहानियाँ Hindi stories for kids panchatantra

हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Saturday, 28 July 2018

वर्ल्ड की बेस्ट कहानियां stories in Hindi

story in hindi इस लेख का प्रमुख टॉपिक है जिसमे आप को panchatantra kahaniya और hindi short stories with moral के साथ ही funny story hindi moral और very short stories with morals in hindi जैसी टॉपिक पे भी कहानी दी गयी है.इसमें आप को panchatantra stories in hindi with moral values पर भी कहानी दिया गया है  जो आप को पढने के बाद कुछ ना कुछ सीख दे के जाएँगी.

कहानी-1 इन्सान का लालच

रमेश अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए  मेहनत-मजदूरी करता था एक दिन वो मजदूरी करने के
लिए बाज़ार में बैठा था तभी उसे एक बूढ़े इन्सान ने आवाज़ लगायी और कहा "मुझे इस नगर की सीमा तक जाना है मेरे पास 3 पोटली है अगर उनमे से अगर एक तुम उठा लो तो बहुत अच्छा होगा ".

रमेश ने सब से भारी वाली पोटली उठा ली जो सच में बहुत भारी थी .
रमेश बोला-ये तो बहुत भारी है
बूढा बोला-तुम्हे मजदूरी में एक सोने का सिक्का दूंगा
रमेश तैयार हो गया चलते -चलते  रमेश ने पूछा-बाबा इसमें क्या है? जो इतना भारी है 
बूढ़े ने कहा -इसमें  पीतल  के सिक्के है लेकिन तुम इसे लेकर भाग मत जाना तुम्हे तुम्हारी मजदूरी मिल जाएगी"
रमेश-कैसी बात करते हो बाबा आप परेशान ना हो 
कुछ देर चलने के बाद एक नदी आयी अब उस नदी को पार करना था तभी उस बुढे इन्सान ने कहा-देखो
भाई मुझसे 2 पोटली ले के नदी पार नहीं हो सकती है इसलिये इसमें से एक पोटली तुम ले लो इसमें  चाँदी के सिक्के है ले के भाग मत जाना 
रमेश-मुझे सिर्फ अपनी मजदूरी से मतलब है बाबा इसमें कुछ भी हो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है
नदी पार करने के बाद उन्हें एक पहाड़ मिला तब उस आदमी ने कहा-भाई ये पोटली ले के मुझसे पहाड़ नहीं चड़ा जायेगा.इस पोटली को भी तुम्हे लेना पड़ेगा लेकिन इसमें सोने के सिक्के है मै मजदूरी में तुम्हे एक सिक्का और दे दूंगा .


रमेश पोटली ले के आगे चलने लगा और जल्दी ही उसने पहाड़ पार कर लिया लेकिन जब उसने पीछे मुड कर देखा तो वो बूढा कही नहीं दिखा तब रमेश ने सोचा शायद वो पीछे छूट गया है और वो उसका इंतजार करने लगा .
तभी उसके दिमाग में आया क्यों ना ये 3 पोटली ले के गायब हो जाऊ कौन -सा बूढा उसे पहचानता है. उसने देखा अब उसे बूढा दिख रहा है बहुत दूर से वो चला आ रहा था धीरे-धीरे.
रमेश तीनो पोटली ले के  गायब हो गया जब  घर पहुच कर रमेश ने वो पोटली खोली तो देखा उसमे पत्थर भरा था ,एक पोटली में उसे एक कागज का टुकड़ा मिला जिस पे लिखा था-मै इस देश कर राजा हु और अपने खजाने के देख -भाल के लिए एक इमानदार इन्सान की तलाश में था  लेकिन तुम इस परीक्षा में पास नहीं हुए .
ये पढ़ कर रमेश ने अपना सर पकड़ लिया .
सीख-लालच इन्सान का विवेक छीन लेता है और उसे भले बुरे का फर्क नहीं दिखता है .इसलिये लालच ना करे

कहानी-2 आखिरी ज्ञान


गुरुकुल में पढ़ रहे बच्चो को आज बहुत खुशी हो रही थी वो 12 साल पढने के बाद अपने घर लौट रहे थे .
गुरु जी भी अपने शिष्यों के शिक्षा से खुस थे और अपने शिष्यों  को आखिरी उपदेश देने की तैयारी कर रहे थे .
उन्होंने कह- सभी एक जगह आ जाये मुझे आप सब को आखिरी उपदेश देना है 
गुरु जी की बात सुन कर सब एक जगह इकट्टे हो गये.गुरु जी ने अपने हाथ पे लकड़ी के कुछ खिलोने लिए हुए थे उन्होंने उन खिलोनो को दिखाते हुए कहा -इन्हें ध्यान से देखो और बताओ इनमे क्या अन्तर है ?
सभी शिष्य बड़े ध्यान से उन्हें देखने लगे वो सोच रहे थे की ये तो तीनो लकड़ी के बने हुए है और एक जैसे है भला इनमे क्या अंतर है .तभी एक ने कहा -ये देखो इनमे से एक के कान में छेद है
 ये संकेत काफी था उन्होंने  जल्दी ही पता लगा लिया और कहा-गुरु जी इनमे सिर्फ इतना अंतर है की एक के दोनों कान में छेद है ,दुसरे के एक कान में छेद है और मुँह में छेद है और तीसरे के सिर्फ एक कान में छेद है. 

गुरु जी ने कहा -बिलकुल सही

अब गुरु जी ने उन्हें एक पतला तार दिया और कहा गुड्डे के कान में डालो ,शिष्यों ने वैसा ही किया और तार एक कान से होते हुए दुसरे कान से निकल गया .दुसरे गुड्डे के कान से होते हुए मुँह से निकल गया और तीसरे गुड्डे के कान में घुसा और कही से नहीं निकला.
तब गुरु जी ने-इन तीनो गुड्डो की तरह ही आप के जीवन में तीन तरह के इन्सान आएंगे पहले गुड्डे की तरह आप को कई इन्सान ऐसे मिलेंगे जो आप की परेशानी एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकाल देंगे ऐसे इन्सान से कभी भी अपनी परेशानी ना बताये,दूसरा गुड्डा ऐसे लोगो को दर्शाता है जो आप की बात सुनते है और दुसरो से जा के बोलते है ऐसे लोगो से दूर रहे और कभी-भी ऐसे लोगो को अपनी परेशानी ना बताये,तीसरा गुड्डा ऐसे लोगो दर्शाता है जिनपे आप भरोसा कर सकते है जिनको आप कुछ भी बता सकते है यही लोग आप की ताकत है इसलिये ऐसे लोगो को कभी भी अपने से दूर ना करे .

कहानी-3 बुरी आदत


एक सेठ अपने लड़के के बुरे आदत से बहुत परेशान था वो जब भी उसको समझाता वो कहता -मै तो अभी छोटा हु धीरे-धीरे  ये आदत छोड़ दूंगा. 

लेकिन वो कभी भी अपनी आदत छोड़ने के कोशिस नहीं करता.उन्ही दिनों एक साधू उस गाँव में आये हुए थे जब उस सेठ ने उनके बारे में सुना तो उनके पास गया और अपनी सारी दिक्कत उनको बतायी.साधू ने उनकी बात सुनी और कहा-आप अपने बेटे कल बगीचे में ले के आये मै वही आप को उपाय बताऊंगा .
अगले दिन सेठ अपने बेटे को लेकर साधू के पास गया .साधू में उस लड़के से कहा -आओ हम बगीचे में घुमते है.
वो धीरे -धीरे  घूमने लगे .चलते-चलते उस साधू ने कहा -क्या तुम एक छोटे से पैधो को उखाड़ सकते हो ?
लड़के ने कहा-हाँ इसमें कौन सी बड़ी बात है  और उसने आसानी से एक पैधा उखाड़ दिया फिर वो आगे बड गये.
साधू ने एक बड़े पौधे की तरफ इशारा करते हुए कहा-क्या तुम इसे उखाड़ सकते हो ?
लड़का तुरंत उस पेड़ को उखाड़ने लगा इस बार उसको काफी मेहनत करनी पड़ी तब जा के उस से उखड़ पाया .
वो फिर आगे बड गये अब साधू ने उसको एक गुडहल का पेड़ दिखाया और उसे उखाड़ने को बोला लड़के ने तना पकड़ा और जोर -जोर से खीचने लगा लेकिन वो उखाड़ नहीं पाया .जब बहुत कोशिस करने के बाद भी  वो उसे उखाड़ नहीं पाया तब उसने कहा -ये तो बहुत मजबूत है इसे उखाड़ना संभव नहीं है
तब साधू ने उसे प्यार से समझाते हुए कहा बेटा-ठीक ऐसा ही बुरी आदतों के साथ भी होता है जब वो नई होती है तब उन्हें छोड़ना आसान होता है लेकिन जब वो पुरानी हो जाती है तब उन्हें छोड़ना उतना ही मुश्किल हो जाता है "
लड़का उनकी बात समझ गया और उसने बुरी आदत छोड़ने का अपने आप से वादा किया .

कहानी-4 हार ना माने

बहुत समय पहले की बात है एक गाँव में एक किसान रहता था उसके पास बहुत सारे जानवर थे उनमे एक गधा भी था .
एक दिन गधा घास खाते-खाते एक कुए के पास पहुच गया और उसमे गिर गया .गिरते ही वो चिल्लाने लगा .
उसकी आवाज़ सुन कर खेत में काम कर रहे लोग वहा पहुच गये और सब ने किसान को बुलाया .
उसे गधे पे दया तो आयी लेकिन उसने सोचा इस बुढे गधे को बचाने का कोई फायदा नहीं है और इसमें मेहनत भी बहुत करनी पड़ेगी .

फिर उसने बाकी लोगो से कहा -मुझे नहीं लगता हम इस गधे को यहाँ से निकाल सकते है इसलिये आप सब अपना काम करे टाइम बर्बाद करने से कुछ नहीं होगा  और ऐसा कह कर वो आगे बढ़ने वाला ही था की एक मजदूर बोला -मालिक इस गधे ने सालो तक आप की सेवा की है इसलिये इसको इस तरह तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ने से अच्छा है की हम इसको यही दफना दे  "
किसान ने कहा -हाँ सही कहते हो चलो इसमें मिटटी डालो और इसको यही दफ़न कर दो

गधा ये सब सुन रहा था उसे लगा मेरे मालिक मुझे बचाने की जगह मुझे मारने की कोशिस कर रहे है .ये सब सुन कर वो डर गया लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और भगवान को याद कर के वहा से निकलने की कोशिस करने लगा .
अभी वो सोच ही रहा था की तभी उसके ऊपर मिटटी की बारिश होने लगी गधे ने मन ही मन सोचा भले ही चाहे कुछ भी हो लेकिन वो अपनी कोशिस नहीं छोड़ेगाऔर वो पूरी तरह से तैयार हो कर उछाल लगाने लगा .गधे के ऊपर जब भी मिटटी पड़ती वो उछल कर उसे गिरा देता और खुद उसके ऊपर खड़ा हो जाता.किसान ने ये सब देखा और सोचा की अगर वो ऐसे ही मिटटी डलवाता रहा तो इसकी जान बच जाएगी और धीरे-धीरे ऐसे ही कर -कर के गधा कुए के ऊपर आ गया .
हमारी ज़िन्दगी भी ऐसे ही होती है हम चाहे जितनी कोशिस करे लेकिन कभी ना कभी मुसीबत रूपी गड्ढे में गिर ही जाते है .लेकिन गिरना कोई बड़ी बात नहीं है बड़ी बात है उस मुसीबत से निकलना.बहुत सारे लोग बिना कोशिस के ही हार मान जाते है और जो लोग मेहनत करते है तो भगवान भी उसका साथ देते है .


कहानी-5 आत्म सम्मान

एक भिखारी रेलवे स्टेशन पे पेन ले के बैठा हुआ था तभी एक इन्सान आया और उसने उसके कटोरे में 50 रुपए डाल दिये लेकिन कोई पेन नहीं लिया .
                                              
डिब्बे का दरवाजा बंद होने ही वाला था की वो इन्सान ट्रेन से उतरा और भिखारी के पास गया और कुछ पेन उठा के बोला -मै कुछ पेन लूँगा इन पेन की कीमत है आखिर कार तुम एक व्यापारी हो और मै भी  
उसके बाद वो युवा तेज़ी से ट्रेन में चढ़ गया .कुछ सालो बाद वो युवा एक पार्टी में गया वहां पे वो भिखारी भी था .
वो भिखारी उस युवा के पास गया और बोला -शायद आप मुझे नहीं पहचान रहे है लेकिन मै आप को पहचानता हु  और उसने उस दिन की बात याद दिलायी.
तब युवा ने कहा -हाँ मुझे याद आ गया तुम भीख मांग रहे थे लेकिन तुम यहाँ पे सूट और टाई में क्या कर रहे हो ?
तब उस भिखारी ने कहा-आप को शायद मालूम नहीं है आप ने मेरे लिए उस दिन क्या किया ,मेरे ऊपर दया करने की बजाये आप मेरे साथ सम्मान से पेश आये आप ने कटोरे से पेन उठा के कहा इनकी कीमत है ,तुम एक व्यापारी हो और मै भी,आप के जाने के बाद मैंने बहुत सोचा मै क्या कर रहा हु? ,मै भीख क्यों मांग रहा हु? ,मैंने अपना बैग उठाया और पेन बेचने लगा घूम-घूम कर ,धीरे -धीरे मेरा व्यापार बहुत अच्छा होने लगा,मैंने फिर कॉपी,किताब भी बेचना शुरु कर दिया और आज इस शहर का सब से बड़ाथोक विक्रेता हु ,मुझे मेरा सम्मान आप की वजह से मिला ,मै आप को बहुत ही धन्यवाद देता हु 


आप अपने बारे में क्या सोचते है ?खुद के लिए आप क्या राय ज़ाहिर करते है ,क्या आप अपने आप को ठीक तरह से समझ पाते है इन सारी चीजों को ही हम आत्म सम्मान कहते है ,दुसरे लोग हमारे बारे में क्या कहते है ये बातें उतना मायने नहीं रखती है .

कहानी-5 चोर और साधू

एक साधू का भगवान पे बहुत भरोसा था. जो भी उन के घर में एक बार आ जाता वो उनके आदर और अथिति भावना से खुश हो जाता था .

उनके मन में लोगो के लिए बहुत जादा प्रेम था इसलिये लोग उनकी बहुत इज्ज़त करते थे और उनसे प्रेम भी करते थे .
एक दिन जेल से भागा हुआ चोर पुलिस से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहा था तभी उसने देखा साधू के घर का दरवाजा खुला हुआ है और साधू के घर में घुस गया .
साधू ने उसे देखते ही कहा -तुम्हरा इस घर में स्वागत है मेरे भाई लेकिन पहले तुम ये बताओ तुम कौन हो ?और यहाँ क्या करने आये हो?
तब चोर ने कहा -महाराज मै एक मुसाफिर हु और रास्ता भटक गया हु इसलिये इधर -उधर भटक रहा था आप का दरवाजा खुला देख कर मै यहाँ पे आ गया ,क्या मुझे एक रात के लिए आप शरण दे सकते है? मै सुबह होते ही चला जाऊंगा 
साधू ने कहा-हाँ क्यों नहीं तुम यहाँ आराम से रह सकते हो ,मुझे लगता है तुम बहुत थक गये हो ,जा कर मुँह-हाथ धो लो  मै तुम्हारे खाने -पीने का इंतजाम करता हु 

इस पर चोर अपने हाथ -पैर धोने के लिए चला गया और साधू ने उसके खाने -पीने और सोने का इंतजाम कर दिया .
साधू ने उसका बहुत अच्छे से ध्यान रखा और उसको सोने के लिए बहुत अच्छा बिस्तर दिया .रात में सभी के सो जाने के बाद चोर के मन में चोरी की इच्छा ज़ाहिर हुई और साधू के घर से सोने के 2 दीपदान चुरा के भाग गया .पुलिस उसको खोज रही थी इसलिये वो पकड़ा गया और उसने सब कुछ सही बता दिया और बोला -मैंने ये दीपदान साधू के घर से चुराए है 
इस पर उसे सब साधू के घर ले के गये .साधू ने कहा -कृपा आप इन्हें छोड़ दे ये मेरे घर में मेहमान बन कर आये थे और ये दीपदान मैंने इन्हें उपहार में दिये है 
इतना सुनते ही चोर की ज्ञान इंद्री खुल गयी और उसे अपनी भूल का एहसास हो गया था .उसने माफ़ी मांगी और कभी भी चोरी ना करने का कसम खाया

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