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पंचतंत्र कहानियाँ Hindi stories for kids panchatantra

हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Tuesday, 11 September 2018

परिवार और फूटे घड़े की कहानी kahani in hindi

ये है  panchtantra ki kahani hindi और moral stories for childrens in hindi इस पोस्ट में बताई गई है और इसके आलावा hindi bal kahani या kahaniya in hindi या फिर inspirational stories in hindi for students और kahani hindi में read करें और कुछ सीख लें.



                                      कहानी 1- परिवार क्या है?

एक आदमी देर से काम से घर आया, थका हुआ और परेशान,
अपने 5 साल के बेटे को दरवाजे पर उसके लिए इंतजार करने के लिए।
बेटा: "पिताजी, क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं?"
पिता: "हाँ पुछो?"
बेटा: "पिताजी, आप एक घंटे में कितना कमाते हैं?"
पिता: "यह तुन्हारे काम की बात नहीं है। तुम इतनी चीज़ क्यों पूछते हो? "आदमी ने गुस्से में कहा।
बेटा: "मैं बस जानना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताओ, आप एक घंटे में कितना कमाते हैं? "
पिता: "अगर तुम्हे जानना ही है तो मैं $ 20 प्रति घंटे कमाता हूं।"
बेटा: "ओह,", "पिताजी, क्या मैं $ 10 उधार ले सकता हूं?"
पिता क्रोधित थे, "अगर  तुमने यही एकमात्र कारण पूछा है तो तुम खरीदने के लिए कुछ पैसे उधार ले सकते हो और क्या करोगे एक खिलौना खरीद लोगे बस और वो भी कुछ दिन बाद ख़राब कर दोगे, तुम सीधे अपने कमरे में अपने बिस्तर पर जाओ।
और इस बारे में सोचो कि तुम इतने स्वार्थी क्यों हो। मैं इस बचपन के व्यवहार के लिए हर रोज कड़ी मेहनत करता हूं। "
छोटा लड़का चुपचाप अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया। आदमी बैठ गया और यहां तक ​​कि बडबडाना शुरू कर दिया और छोटे लड़के के सवालों के बारे में परेशान और सोचने लगा। "वह कुछ पैसे लेने के लिए ऐसे प्रश्न पूछने की हिम्मत कैसे करता है"?
लगभग एक घंटे के बाद, आदमी शांत हो गया, और सोचने लगा: शायद उसे वास्तव में $10 की आवश्यक थी ।
आदमी छोटे लड़के के कमरे के दरवाजे के पास गया और दरवाजा खोला।


पिता: "तुम सो रहे हो, बेटा?"।
बेटा: "नहीं पिताजी, मैं जाग रहा हूं," ।
पिता ने कहा, "मैं सोच रहा था, शायद मैं तुम पर बहुत ज्यादा चिल्ला दिया।" "मेने  तुम्हे $10 के लिए इतना चिल्ला दिया। "
छोटा लड़का सीधे मुस्कुराकर बैठ गया।
पिता: ने उसे  $10 दे दिए ।
बेटा: "ओह, धन्यवाद पिताजी!" फिर, अपने तकिए के नीचे से उसने कुछ पैसे निकाले ।
पिता:, यह देखकर कि लड़के के पास पहले से पैसा था, फिर से गुस्सा होना शुरू कर दिया।
छोटे लड़के ने धीरे-धीरे अपना पैसा गिन लिया, और फिर अपने पिता को देखा।
पिताजी ने गुस्से में कहा, "यदि तुम्हारे पास पहले से कुछ पैसे थे तो तुम्हे और अधिक पैसा क्यों चाहिए थे?"
छोटे लड़के ने जवाब दिया, "क्योंकि मेरे पास पर्याप्त नहीं था, लेकिन अब हो गए है।"
"पिताजी, मेरे पास अब $20 हो गए है । क्या मैं आपका एक घंटा खरीद सकता हूँ? कृपया कल जल्दी घर आओ।
मैं आपके साथ खाना खाना चाहता हूं। "
इस कहानी को अपनी पसंद के किसी व्यक्ति के साथ share करें .... लेकिन इससे भी बेहतर, किसी के साथ जिसे तुम प्यार करते हो उसके साथ समय बिताए।


यह आप सभी को जीवन में इतनी मेहनत करने के लिए बस एक छोटा reminder है।
हमें उन लोगो के साथ समय बिताना चाहिए जो वास्तव में हमारे लिए महत्वपूर्ण है, जो हमारे दिल के करीब हैं।
"अगर हम कल मर जाएंगे, तो जिस कंपनी के लिए हम काम कर रहे हैं, वह हमें आसानी से बदल सकता है"।
लेकिन परिवार और दोस्तों को हम पीछे छोड़ देंगे, उनके बाकी के जीवन के लिए नुकसान महसूस करेंगे। और आओ इसके बारे में सोचें, हम अपने परिवार की तुलना में खुद को काम में डाल देते हैं। वास्तव में एक मूर्ख निवेश! तो कहानी का नैतिक क्या है ???
बहुत मेहनत मत करो ... और आप जानते हैं कि परिवार का पूरा शब्द क्या है?
FAMILY = (F)ATHER (A)AND (M)MOTHER (I) (L)LOVE (Y)YOU!



                                          कहानी 2- फूटा घड़ा 


एक समय की बात है किसी गाँव में एक किसान सुबह उठ कर अपने घर से दूर नदी से पानी लेने जाया करता था.
वह दो बड़े घड़ों में पानी लाया करता था, और वह घड़ों को एक डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर लटका लेता था.
एक घड़े में दरार थी, और जबकि दूसरे घड़ा सही था.
हर रोज घर तक पानी लाते-लाते उस घड़े का सारा पानी धीरे-धीरे खत्म होते बस आधा घड़ा पानी ही रह जाता और ऐसा दो सालों से चल रहा था.
जो घड़ा सही था उसे इस बात का बहुत घमण्ड था की वह पूरा का पूरा पानी घर तक सही पहुंचा पाता है और उसके अन्दर कोई कमी नही है और वहीँ दूसरा घड़ा इस बात से बहुत शर्मिंदा था की वह पानी आधा ही पहुँचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है तो फूटा घड़ा इस बात को लेकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नही गया और उसने किसान से कहा की मालिक! में आपसे माफ़ी मांगना चाहता हूँ हर-रोज मेरी वजह से आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है.
किसान ने पूछा: क्यों?
घड़े ने दुखी होते हुए कहा: शायद आप नहीं जानते की में एक जगह से फूटा हुआ हूँ और पिछले 2 सालों से, मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था में नहीं पहुँचा पाया बस उसका आधा ही पहुँचा पाया हूँ मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है.


किसान: घड़े की बात सुनकर थोडा दुखी हुआ और कहा कोई बात नहीं आज घर लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो ।
घड़े ने ऐसे ही किया वह रस्ते में सुन्दर फूलों को देखता आया और ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर हुआ तो वेसे ही घर पहुँचते उस घड़े का पानी आधा ही रह गया और वह मायूस होकर किसान से क्षमा मांगने लगा.
किसान ने कहा : शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पुरे रस्ते में जितने भी फूल थे वो सब बस तुम्हारी तरफ ही थे सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था ऐसा इसलिए क्यूंकि में तुम्हारे अन्दर की सारी कमी को जानता था और मेने इसका लाभ उठाया मेने तुम्हारे वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे वाले बीज बो दीए और तुम्हारी वजह से वह रास्ता इतना खूबसूरत बन गया और आज तुम्हारी वजह से ही में इन फूलों को भगवान् को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ और अब "तुम्ही सोच लो" अगर तुम ऐसे नहीं होते तो क्या में ये सब कुछ कर पाता.
"हम सभी के अन्दर कोई न कोई कमी तो होती ही है और यही कमियाँ हमे अनोखा बना देती है".
तो हमे भी उस किसान की तरह लोगो को जो जैसा है वेसे ही स्वीकार करना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए और जब हम ऐसा करेंगे तो फूटा घड़ा भी अच्छे घड़े से मूल्यवान हो जाएगा.

एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

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