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पंचतंत्र कहानियाँ Hindi stories for kids panchatantra

हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Tuesday, 4 September 2018

पंचतंत्र कहानी kahaniya in hindi

अगर आप खोज रहे है panchatantra kahaniya या panchatantra stories in hindi तो आप इस post में जरुर पढ़ सकेंगे और baccho ki kahaniya या child story in hindi या फिर inspirational stories in hindi में read करें और बच्चों को सुनाय भी और पढाएं भी आपको short stories in hindi जरुर पसंद आयंगी.


                             कहानी 1 :- खरगोश और कछुए की कहानी

एक बार की बात है एक खरगोश और कछुआ कही जा रहे थे और अचानक से आपस में मिल गए और दोनों में खूब बातें हुई हसी मजाक हुई और तभी आपस में दोनों की हार जीत को लेकर बेहेस होने लगी तो खरगोश ने कहा की एक race करते है और जो सबसे पहले पहाड़ी के दुसरी तरफ पहुंचेगा वो जीत जायगा और तभी फैसला हो जाएगा की कौन किस से कम है क्यूंकि खरगोश बहुत चालक था उसने सोचा की में तो जल्दी से दौड़ के भाग जाऊंगा और ये कछुआ तो अपनी धीमी-धीमी चाल से कहा मुझसे जीत पाएगा तो दोनों की race start होती है की खरगोश आगे निकल जाता है और वह थक जाता है वह सोचता है की में तो बहुत आगे निकल आया हूँ थोड़ा आराम कर लेता हूँ तो एक पेड़ की छाया में लेट जाता है आराम करते-करते उसको नींद आ जाती है वह सोचता है की थोड़ा सो लेता हूँ कछुआ तो अभी बहुत दूर है और आसानी से उसको में हर दूंगा खरगोश सो जाता है और वह जब तक उठता है की वह देखता है कछुआ finishing line तक पहुँच गया है जब तक खरगोश तेजी से भागते हुए आता है इतने में कछुआ line cross कर लेता है और वह जीत जाता है.
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa


इस कहानी से हमे सीख मिलती है की ज्यादा over confident नहीं होना चाहिए कभी इससे हमे ही नुक्सान हो सकता है और न ही किसी को किसी से कम समझना चाहिए. अगर लगातार जीतना है तो आपको team में काम करना होगा और सीखना होगा, आपको अपनी काबीलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा.
एक बात का और ध्यान दीजिये की जब कभी आप फैल हों तो या तो ज्यादा मेहनत कीजिये या फिर अपनी planing को chnage करिए या फिर दोनों ही कर सकते है , पर कभी भी हार को आखिरी मान कर मत बैठ जाइए उससे लड़िये दरिये नहीं बड़ी से बड़ी हार के बाद भी जीता जा सकता है!

                                 कहानी 2 :-किसान और सारस 

एक किसान बगुलों से बहुत तंग आ गया था उसके खेत जंगल के पास था किसान जैसे ही बीज बो कर अपने घर जाता वेसे ही सरे पक्षी अपने झुंड के साथ आते और मट्टी कुरेद-कुरेदकर बोये हुए बीजो को खा जाते. किसान पक्षियों को उड़ाते-उड़ाते थक चूका था और फिरसे उसे खेत को दुबारा से जोतना पड़ता और इसी वजह से किसान बहुत ज्यादा परेशान हो गया था एक दिन उसने सोचा क्यूँ ना एक जाल बिछा दूँ और उसने ऐसा ही किया खेत पे उसने जाल बिछा दिया और इस बार फिर से उस खेत में पक्षी आए और उस जाल में फँस गए और इस बार एक सारस पक्षी भी उस जाल में फँस गया.

और जब किसान ने उस पक्षियों को पकने गया तो एक सारस भी पकड़ा गया और तभी वह सारस बोला की मुझे माफ़ करिये दया करिए मुझपे मैंने आपका कोई नुख्सान नहीं किया है. में तो सारस हूँ खेती को हानी पहुँचाने वाले कीड़ों को में खा जाता हूँ मुझे छोड़ दीजिये.
लेकिन किसान बहुत ही गुस्से में था. वह बोला! - 'तुम कहते हो मुझे माफ़ करो मेने कुछ नहीं किया है और आज तुम उन्ही चिड़ियों के साथ मिलकर मेरे खेत के सारे बीज को खा गए हो अब जब तुमने भी ऐसा किया है तो तुम भी दंड भुगतो'.
इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की हम जैसी सांगत में रहते है वेसे ही बन जाते है.

                                 कहानी 3:- प्यासी चींटी और कबूतर 


एक दिन की बात है गर्मियों का मौसम था एक प्यासी चींटी पानी की तलाश कर रही थी कुछ देर इधर-उधर पानी के लिए भटकती रही लेकिन पानी नहीं मिला और वह चली गई और तभी उसे एक नदी दिखाई दि चींटी उस नदी के पास पहुंची लेकिन पानी पीने के लिए वह सीधे नदी में नहीं जा सकती थी इस वजह से वह एक पत्थर पर चढ़ गई और पानी पीने की कोशिश कर रही थी की वह नदी में ही गिर गई उस नदी के पास एक पेड़ था जहाँ एक कबूतर पेड़ की टेहनी में बैठा था और उसने उस चींटी को नदी में गिरते हुए देख लिया और उसे तरस आ गया और उसने जल्दी से नदी में संघर्ष कर रही चींटी को बचने के एक पत्ता तोड़ा और उसकी ओर फेंका और चींटी जल्दी से उस पत्ते पर चढ़ गई और थोड़ी देर बाद पत्ता तैरता हुआ सुखी जमीन की तरफ आ

गया और चींटी ने उस सुखी जमीन पर छलांग लगाईं और बाच गई. फिर उसने उस पेड़ कली ओर उपर देखा और कबूतर को धन्येवाद किया फिर एक दिन एक शिकारी उस नदी किनारे पहुंचा और उसने उस कबूतर की ओर जाल बिछाया और उसने दाना दाल दिया और थोड़ी दूर जाकर छुप गया वह इस उम्मीद में था की कबूतर दाना लेने जरूर आएगा तभी में उस कबूतर को पकड़ लूँगा कबूतर जैसे ही दाना लेने आया की वह उस जाल में फँस गया और उस शिकारी ने कबूतर को पकड़ लिया वह चींटी जिसको कबूतर ने बचाया था उसने देख लिया की वह शिकारी कबूतर को ले जा रहा है  चींटी जल्दी से उस शिकारी के पास गई और उसकी एड़ी में जोर से काट लोया और शिकारी ने तुरंत जाल को छोडकर अपने पैर देखने लगा और इस तरह से कबूतर बच गया.

कर भला हो भला तो इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है की जब हम किसी की मदद करते है तो उसका फल हमे जरूर मिलता है जैसे कबूतर ने बिना किसी स्वार्थ के चींटी की जान बचाई उसके फलस्वरूप मुश्किल समय में चींटी ने भी कबूतर की जान बचाई तो बिना किसी स्वार्थ के मदद जरूर करे चाहे वो किसी का भला करने से मदद करने से कभी पीछे न हटें.


एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.
मजेदार कहानिया :- hindi kahani

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