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पंचतंत्र कहानियाँ Hindi stories for kids panchatantra

हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Saturday, 8 September 2018

पंचतंत्र की कहानी story in hindi

 अगर आप baccho ki kahaniya या panchatantra in hindi या फिर motivational stories for students जैसी कहानियां ढूंड रहे है तो आप यहाँ सही आए है यहाँ आपको inspirational stories for students और kahaniya in hindi में मिल जाएंगी बच्चों के लिए बहुत ही प्रेरणा दायक कहानियां है इस post में.


                                               कहानी 1 - बाड़ में एक छेद

एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का था, जिसे बहुत ज्यादा गुस्सा आता था ।
वह अपने माता-पिता के साथ रहता था और वह उनका इकलौता बेटा था.
और उस छोटे लड़के के माता-पिता उसके गिस्से से बहुत परेशान और उदास थे.
उस लड़के को बहुत जल्दी गुस्सा आता था और दुसरो को गुस्से से कुछ भी बोल देता था ताना कोसता था और वह इस तरह दूसरों को बोल देता था जिससे उनलोग को चोट पहुँचती थी और अपने गुस्से की वजह से अपने दोस्तों, पड़ोसी और बच्चो को डांट चूका था बुरा भला कह चूका था.
इस वजह से उसके मित्र और पड़ोसी उसे हमेशा टाल देते थे.
इन्ही सब बातों की वजह से उसके माता पिता बहुत परेशान रहते थे और उसके माता-पिता ने कई बार उसको सलाह भी दी समझाया की उसको अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए और प्यार से अपनी ज़िन्दगी को आगे बढ़ाना चाहिए और दुर्भाग्य से उनके सारे प्रयास असफल रहे.
आखरी में लड़के के पिता के दिमाग में एक ख्याल आया और अपने बेटे से कहा की जब भी तुम्हे गुस्सा आने लगे तो तुम एक कील बाड़ पर थोक देना जिससे उसका गुस्सा चला जाएगा और उस बच्चे को ये बात सुन के बड़ा मज़ा आया और अपने पिता की बात मान ली.


तो जब भी उसे गुस्सा आता वो बाड़ की तरफ जाता और एक कील थोक देता और उसके गुस्से की वजह से उसने पहली बार में ही 30 कील थोक दी और कुछ दिन के बाद बाड़ पे ठोकी गई कील की संख्या आधे से कम होने लगी और उस लड़के को हतोड़े के साथ कील ठोकने में मुश्किल होने लगी और फिर उसने अपना गुस्सा control में रखने का निर्णय लिया और इस वजह से धीरे-धीरे बाड़ में ठोकी गई कीलों की संख्या और भी कम होती गई और एक दिन ऐसा भी आ गया जब कोई भी कील नहीं ठोकी गई क्यूंकि उसे गुस्सा ही नहीं आया अगले कुछ दिनों में भी उसे गुस्सा ही नहीं आया और उस दिन से उसे कोई भी कील या हतोड़ी को उठाने की जरुरत ना पड़ी.
अब वह अपने पिता जी के पास गया और उन्हें अपनी बात बताई उसके बाद उसके पिता जी ने उससे कहा की अब जब भी उसका गुस्सा नियंत्रण में रहेगा तब वह बाड़ में लगे सारे कीलों को निकालेगा.
कई दिन बीतने के बाद लड़के ने बाड़ में लगे सारे कीलों को निकाल दिया और उसमें से बहुत सारे कील थे जो वह ना निकाल पाया.
लड़के ने अपने पिता को इसके बारे में भी बताया तो पिता ने लड़के को कहा की तुम्हे वहां क्या दीखता है.
लड़के ने कहा की बाड़ में एक छेद.
पिता ने कहा ये तुम्हारा गुस्सा था जो तुमने लोगो पे उतारा तुम कीलो को तो निकाल सकते हो लेकिन बाड़ में लगा छेद तो हमेशा रहेगा और बाड़ अब कभी भी पहले जैसा नहीं दिखेगा उसके ऊपर अब तो निशान पड़ चुके है और कुछ कीलों को तो बाहर भी नहीं निकाल सकते.
तुम एक चाकू के साथ एक आदमी पर वार कर सकते हो और बाद में माफ़ी भी मांग सकते हो लेकिन वो घाव तो हमेशा के लिए ही रहेगा ठीक उसी तरह तुम्हारा गुस्सा और गुस्से में कहे गए शब्द बुरे शब्द का प्रयोग शारीरिक तुलना में ज्यादा दर्द देता है तो अच्छे उद्देशियों के लिए शब्दों का प्रयोग करो रिश्तों को विकसित करने के लिए उनका प्रयोग करो प्यार और अपने हिर्दय में दया दिखाने के लिए उसका ठीक से प्रयोग करो.
"तो इस कहानी से यही सीख मिलती है कि बुरे शब्द का प्रयोग जीवन भर नुक्सान ही करेगा तो हमारे शब्द हमेशा दयालु और मीठे होने चाहिय".



                                                कहानी 2 - दादा जी की मेज 

एक कमजोर बूढ़ा आदमी अपने बेटे, बहु और चार साल पोते के साथ रहने के लिए चला गया ।
उस बुजुर्ग आदमी के हाथ कांपने लगे थे, उसकी नज़रें भी धुंधली पड़ गईं थी, और उसका कदम लड़खड़ा ने लगा था ठीक से नहीं चल पाता था.
एक रात परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे।
लेकिन बुजुर्ग दादा के अस्थिर हाथों और नाकाम नजर ने खाने को मुश्किल बना दिया.
जब वे खाना खा रहे थे तो गलती से उन्होंने समझा की पानी का ग्लास रखा है और जब वे उसे उठाने चले उनके कांपते हाथ की वजह से दूध का गिलास फर्श पर गिर गया, और वह टूट गया.
बेटा और बहु यह देख गुस्साए और इस वजह से दोनों की आपस में चिढ़ हो गई.
दादा ने कहा, "बेटा. माफ़ करना गलती से दूध का ग्लास फर्श पर गिर गया
"तो पति और पत्नी अपने पिता से अलग कोने में एक छोटी सी मेज सेट कर ली ।
वहीं, दादा ने अकेले ही खाया.
परिवार के सभी सदस्यों ने दादा जी को छोड़ कर एक साथ बैठ कर खाने का आनंद लिया जबसे दादा ने एक डिश तोड़ी थी. तबसे उनका खाना एक लकड़ी के बर्तनों में परोसा गया।
दादा के निर्देशन में जब परिवार नजर आया तो कभी-कभार उनको बहुत उदासी हुई और उनकी आँख से आँसू भी गिरे वह अकेले बैठ कर खाना खाते थे.
लेकिन ये सब वह चार साल की उम्र  का बच्चा यह सब खामोशी से देख चुका था.
खाने से पहले एक शाम, पिता अपने बेटे को फर्श पर लकड़ी के खिलोने के साथ खेलता देखा ।
वह बच्चे को मिठाई देते हुए पूछा, "तुम क्या कर रहे हो?" बच्चे ने मीठा खाते हुए, बच्चे ने जवाब दिया, "ओह, मैं


आपके और मां के लिए एक छोटी कटोरी बना रहा हूँ जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तब भोजन खाने के लिए इसी बर्तन में सबको खिलाऊंगा. " चार वर्षीय बच्चा मुस्कुराया और वापस खेलने चला गया ।
ये शब्द सुनकर उसके माता-पिता हक्के-बक्के रह गए ।
फिर वह दोनों सोच में पड़ गए पर उनकी आँखों में भी आंसू निकले।
हालांकि उसके बच्चे ने कोई शब्द नहीं बोला , बस इतनी सी ही अपने बच्चे की बात को सुनकर दोनों की आँखे खुल गई की वे कितना गलत कर रहे थे.
उस शाम पति ने दादा का हाथ थाम लिया और धीरे से उसका नेतृत्व वापस परिवार की मेज पर कर दिया.
तब सबने एक साथ मिलकर परिवार के साथ बैठकर भोजन किया ।
किसी कारण से ना तो पति और ना ही पत्नी ने आपस में ऐसी किसी बात को लेकर झिक-झिक की.
अब जब दूध गलती से गिर गया था , टेबल के लिए एक कपड़ा नेपकिन दाल दिया गया।
बच्चें जैसा देखते है जैसा सुनते है वैसा ही महसूस करते हैं और वैसा ही करते है ।
वे हमें देखते है वैसा ही बन जाते है तो इसलिए बच्चो के सामने एक खुशहाल घर का वातावरण होना चाहिए.
परिवार के सदस्ये जैसा करेंगे वे वैसा ही अपनाएंगे, वे अपने जीवन के बाकी के लिए है कि दृष्टिकोण की नकल करेंगे । क्योंकि बच्चे हमारा भविष्य है.
"सकारात्मक सोच के साथ जीवन में लोगों को अपने साथ जोड़े, और खुद को नकारात्मत सोच से दूर रखें।
बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें अपने आप को और उनको प्यार करो उनका ख्याल रखो, आज और हर रोज़!"



                                          कहानी 3 -जीवन में संघर्ष जरूरी है.

एक आदमी को तितली का एक कोकून मिला ।
और उसने देखा की वह कैसे संघर्ष कर रही है उससे निकलने की; वह बैठ गया और कई घंटे के लिए उसे देखता रहा
कैसे तितली उस छोटे से छेद के माध्यम से अपने शरीर को मजबूर संघर्ष करके बाहार आ रही है ।
फिर उसने देखा और अचानक से तितली ने कोशिश करना बंद कर दिया ।
इसके बाद उस शख्स ने तितली की मदद करने का फैसला किया, इसलिए उसने कैंची से एक जोड़ी ली
और कोकून के बचे हुए bit को कतरने की कोशिश की तितली को आसानी से उभारने के लिए लेकिन वह रुक गया और और उसे देखने लगा यह एक सूजन शरीर और छोटा, सूखा पंख था ।
आदमी को तितली देखना जारी रखा क्योंकि उसे उंमीद है कि, किसी भी पल, पंख बड़ा होगा.
लेकिन वह सोचने लगा की अगर न हुआ तो! ,एक सूजन शरीर और सूखा पंख के साथ चारों ओर तितली अपना बाकी जीवन रेंगते हुए कैसे बिताएगी. यह कभी उड़ नहीं पाएगी ।
उसकी दयालुता और जल्दबाजी में इस आदमी को ये समझ में नहीं आया कि कोकून से तितली को बाहार आने के लिए संघर्ष के लिए आवश्यक प्रतिबंधित टिनी खोलने के माध्यम से शरीर से तरल पदार्थ के लिए मजबूर कर रहे थे.
प्रकृति की तरह अपने पंखों में तितली इस उड़ान के लिए तैयार हो जाएगी बस एक बार वह कोकून से अपनी स्वतंत्रता हासिल करले ।
कई बार हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज़ होती है जिसकी हमे सच में ही आवशयकता होती है अगर बिना संघर्ष के हमे कुछ ऐसे ही मिलने लगा तो हम तो अपंग के सामान माने जाएंगे तो बिना संघर्ष बिना मेहनत के उतने मजबूत नहीं बन सकते जितनी हमारी क्षमता है, इसलिए जीवन में कभी भी कठिन समय का सकारात्मक तरीके से सामना कीजिये इससे वो आपको कुछ सिखा जाएगा जो आपकी जिंदगी की उड़ान को और भी अच्छा बना देगा.


एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

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